Tuesday, 19 April 2011
Wednesday, 6 April 2011
Thursday, 31 March 2011
Monday, 28 March 2011
Thursday, 24 March 2011
All facts about hindi song download.: French model in anti-anorexia campaign dies
All facts about hindi song download.: French model in anti-anorexia campaign dies: "PARIS Isabelle Caro, a French actress and model whose emaciated image in a shock Italian ad campaign helped rivet global attention on the..."
Sunday, 20 March 2011
ALL INDIA ISLAHE ANJUMAN SIDDIQUI (R)
ALL INDIA ISLAHE ANJUMAN SIDDIQUI (R), इस संस्था से दिल के मरीजो का इलाज फ्री करवाया जाता है संपर्क करे -जैनुल हसन फिरदौसी ,अंबिकापुर मोबाइल ९४२५२५३१००
Mobile 9425253100 / 9826867584
07774-223608
Mobile 9425253100 / 9826867584
07774-223608
Tuesday, 15 March 2011
Tuesday, 8 March 2011
बीमारियों से जंग हारता भारत
एक ओर जहां भारत दुनिया की उभरती शक्ति होने का दावा कर रहा है वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा पोलियो, मलेरिया और क्षयरोग से ग्रसित है.
दुनिया के कई प्रगतिशील देशों ने भी इन बीमारियों पर लगभग क़ाबू पा लिया है.
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर के पोलियो के 42 फ़ीसदी, क्षयरोग के 23 फ़ीसदी, कुष्ठरोग के 54 प्रतिशत, काली खांसी के 86 फ़ीसदी और मलेरिया के 55 प्रतिशत पीड़ित भारत में बसते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ भारत में कुपोषित शिशुओं की तादाद पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है.
जानकारों का मानना है कि इन आंकड़ों पर नज़र दौड़ाते वक्त ये भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं जैसे पीने के साफ पानी और स्वच्छता की भी कमी है.
ग़रीबी और कुपोषण पर एक अध्ययन में अरविंद विरमानी का कहना है कि आयु मे बढ़ोतरी और मृत्यु-दर में कमी अलग-अलग बीमारियों पर क़ाबू पाने के नतीजे में नहीं बल्कि पीने के साफ़ पानी और स्वच्छता पर निर्भर करती है.
बुनियादी सुविधाएं
लेकिन यूनिसेफ़ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े इस संबंध में बहुत अच्छी तस्वीर नहीं पेश करते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के सिर्फ 21 प्रतिशत जनसंख्या को 'उन्नत' स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध हैं जबकि 69 फ़ीसदी लोग शौच के लिए खुली जगह में जाते हैं.
हालांकि पीने के साफ़ पानी मुहैया करवा पाने के मामले में हालात पहले से बहुत बेहतर हुए हैं.
भारत ने इस क्षेत्र में सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, ग्रामीण जल आपूर्ति योजना और पूर्ण स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की है.
लेकिन कई राज्य इन योजनाओं के लिए दिए गए धन को पूरी तरह ख़र्च नहीं कर पा रहे हैं.
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में उत्साहर्वधक काम हुआ है लेकिन उड़ीसा में ये बहुत सफल नहीं रहा है.
दुनिया के कई प्रगतिशील देशों ने भी इन बीमारियों पर लगभग क़ाबू पा लिया है.
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर के पोलियो के 42 फ़ीसदी, क्षयरोग के 23 फ़ीसदी, कुष्ठरोग के 54 प्रतिशत, काली खांसी के 86 फ़ीसदी और मलेरिया के 55 प्रतिशत पीड़ित भारत में बसते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ भारत में कुपोषित शिशुओं की तादाद पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है.
जानकारों का मानना है कि इन आंकड़ों पर नज़र दौड़ाते वक्त ये भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं जैसे पीने के साफ पानी और स्वच्छता की भी कमी है.
ग़रीबी और कुपोषण पर एक अध्ययन में अरविंद विरमानी का कहना है कि आयु मे बढ़ोतरी और मृत्यु-दर में कमी अलग-अलग बीमारियों पर क़ाबू पाने के नतीजे में नहीं बल्कि पीने के साफ़ पानी और स्वच्छता पर निर्भर करती है.
बुनियादी सुविधाएं
लेकिन यूनिसेफ़ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े इस संबंध में बहुत अच्छी तस्वीर नहीं पेश करते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के सिर्फ 21 प्रतिशत जनसंख्या को 'उन्नत' स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध हैं जबकि 69 फ़ीसदी लोग शौच के लिए खुली जगह में जाते हैं.
हालांकि पीने के साफ़ पानी मुहैया करवा पाने के मामले में हालात पहले से बहुत बेहतर हुए हैं.
भारत ने इस क्षेत्र में सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, ग्रामीण जल आपूर्ति योजना और पूर्ण स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की है.
लेकिन कई राज्य इन योजनाओं के लिए दिए गए धन को पूरी तरह ख़र्च नहीं कर पा रहे हैं.
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में उत्साहर्वधक काम हुआ है लेकिन उड़ीसा में ये बहुत सफल नहीं रहा है.
Wednesday, 23 February 2011
स्वास्थ्य कर्मचारी दवारा नियमित नौकरी की मांग
संविदा आधार पर नियुक्ति पाए स्वास्थ्य कर्मचारी अब नियमित नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर है।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले आंदोलन कर रहे इन कर्मचारीयों में लैब टेक्निशियंस और स्टाफ नर्स शामिल है।
प्रदेश भर में संविदा आधार पर नौकरी करने वाले कर्मचारी अब आर पार के मुड में नजर आ रहे है। चुनावी साल को देखते हुए कर्मचारी संघ ने दबाव बढा दिया है।
उल्लेखनीय है कि, प्रदेश के स्वास्थ्य अमले में संविदा आधार पर काम करने वाले कर्मचारीयों की संख्या कुछ इस तरह है कि, यदि वे हट जाएं तो पूरी व्यवस्था ही चरमरा जाएगी।
संविदा आधार पर बरसों से नौकरी कर रहे कर्मचारीयों को उम्मीद थी कि, जल्द ही उन्हे नियमित कर दिया जाएगा लेकिन नियमितीकरण नहीं हुआ।
सन 2001 से संविदा आधार पर लैब टेक्नीशियसऔर आंदोलन में शामिल जैनुल हसन फिरदौसीसरकार की संविदा नीति पर सवाल उठाते हुए पूछते है आज नहीं तो कल नियमित होंगे की उम्मीद ने उन जैसे कईयों की उमर ही पार करा दी और अब भी यह तय नही है कि भविष्य क्या होगा ।
हर जिले में धरना प्रदर्शन का सिलसिला खत्म होने के बाद ये कर्मचारी आंदोलन को और उग्र करेंगे।संविदा आधार पर नौकरी करने वाले ये कर्मचारी यदि काम बंद करेगे तो स्वास्थ्य विभाग जो पहले ही बदहाल है वहा चुनावी साल मे और कबाडा होगा जाहिर है सरकार ऐसा कुछ नहीं चाहेगी जो सरकार की गलत इमेज बनाए ये बात संविदा कर्मचारी भी जानते है इसलिए दबाव बनाने में वे कोई कसर नहीं छोडने वाले।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले आंदोलन कर रहे इन कर्मचारीयों में लैब टेक्निशियंस और स्टाफ नर्स शामिल है।
प्रदेश भर में संविदा आधार पर नौकरी करने वाले कर्मचारी अब आर पार के मुड में नजर आ रहे है। चुनावी साल को देखते हुए कर्मचारी संघ ने दबाव बढा दिया है।
उल्लेखनीय है कि, प्रदेश के स्वास्थ्य अमले में संविदा आधार पर काम करने वाले कर्मचारीयों की संख्या कुछ इस तरह है कि, यदि वे हट जाएं तो पूरी व्यवस्था ही चरमरा जाएगी।
संविदा आधार पर बरसों से नौकरी कर रहे कर्मचारीयों को उम्मीद थी कि, जल्द ही उन्हे नियमित कर दिया जाएगा लेकिन नियमितीकरण नहीं हुआ।
सन 2001 से संविदा आधार पर लैब टेक्नीशियसऔर आंदोलन में शामिल जैनुल हसन फिरदौसीसरकार की संविदा नीति पर सवाल उठाते हुए पूछते है आज नहीं तो कल नियमित होंगे की उम्मीद ने उन जैसे कईयों की उमर ही पार करा दी और अब भी यह तय नही है कि भविष्य क्या होगा ।
हर जिले में धरना प्रदर्शन का सिलसिला खत्म होने के बाद ये कर्मचारी आंदोलन को और उग्र करेंगे।संविदा आधार पर नौकरी करने वाले ये कर्मचारी यदि काम बंद करेगे तो स्वास्थ्य विभाग जो पहले ही बदहाल है वहा चुनावी साल मे और कबाडा होगा जाहिर है सरकार ऐसा कुछ नहीं चाहेगी जो सरकार की गलत इमेज बनाए ये बात संविदा कर्मचारी भी जानते है इसलिए दबाव बनाने में वे कोई कसर नहीं छोडने वाले।
daily surguja: भारत की मिटटी का गर्व हैं बेटियाँ घर परिवार को बनत...
daily surguja: भारत की मिटटी का गर्व हैं बेटियाँ घर परिवार को बनत...: "हमारे देश में जब कोई बेटा जनम लेता है तो सब खुश होते है, पर जब किसी बेटी का जनम होते है मातम सा छा जाता है.कई जगह तो लड़के को स्कूल भेजा जा..."
भारत की मिटटी का गर्व हैं बेटियाँ घर परिवार को बनती स्वर्ग हैं
हमारे देश में जब कोई बेटा जनम लेता है तो सब खुश होते है, पर जब किसी बेटी का जनम होते है मातम सा छा जाता है.कई जगह तो लड़के को स्कूल भेजा जाता है लेकिन लड़की को नहीं भेजा जाता क्योंकि वे सोचते है की इन्हें पढ़ा कर क्या फ़ायदा? इन्हें तो चूल्हा ही फूकना है.पर वे लोग यह नहीं जानते की लडकिय अब किसी काम में लड़कों से पीछे नहीं है.
कई जगह तो बेटी के जनम लेते ही इन्हें मार देते है. उन्हें मारने के कारण अब हमारे देश में लड़की की संख्या कम हो गयी है. कई राज्य में लड़की की संख्या कम होने की वजह से शादी नहीं हो पा रही है,दुसरे राज्य की लड़कियों से शादी करना पद रहा है. किसी राज्य में तो लड़के की संख्या १००० है तो लड़कियों की संख्या ७३३ है. इसी कारण एक राज्य के लड़कों को दुसरे राज्य की लडकियों से शादी करना पडरहा है.
ये दहेज़ की वजह से लड़कियों को मारते हैं . वे सोचते है की लड़के उन्हें कम के खिलाएंगे पर वे लोग ये नहीं जानते की माँ बाप का दुःख जितना लड़कियों समझ पाती है उतना लड़के नहीं. मेरी आप लोगों से गुजारिश है की आप लोग ऐसा मत कीजिये
कई जगह तो बेटी के जनम लेते ही इन्हें मार देते है. उन्हें मारने के कारण अब हमारे देश में लड़की की संख्या कम हो गयी है. कई राज्य में लड़की की संख्या कम होने की वजह से शादी नहीं हो पा रही है,दुसरे राज्य की लड़कियों से शादी करना पद रहा है. किसी राज्य में तो लड़के की संख्या १००० है तो लड़कियों की संख्या ७३३ है. इसी कारण एक राज्य के लड़कों को दुसरे राज्य की लडकियों से शादी करना पडरहा है.
ये दहेज़ की वजह से लड़कियों को मारते हैं . वे सोचते है की लड़के उन्हें कम के खिलाएंगे पर वे लोग ये नहीं जानते की माँ बाप का दुःख जितना लड़कियों समझ पाती है उतना लड़के नहीं. मेरी आप लोगों से गुजारिश है की आप लोग ऐसा मत कीजिये
Tuesday, 1 February 2011
Friday, 24 December 2010
Saturday, 11 December 2010
Friday, 10 December 2010
Sunday, 5 December 2010
Thursday, 2 December 2010
Subscribe to:
Posts (Atom)